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1. आज के स्पर्धात्मक युग में विद्यार्थी की हर क्षेत्र में सफलता के लिए उनकी सुषुप्त शक्तियों को जाग्रत करें |
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2. विद्यार्थियों का ओज-तेज बढे, उनकी बुद्धि का विकास हो तथा वे उन्नति के पथ पर उत्साह से भरे कदम रखते हुए आगे बढ़ें |
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3. विद्यार्थियों का जीवन प्रतिभासंपन्न, सदाचारी, सच्चरित्रवान, सामर्थ्यवान बने और वे सुख-समृद्धिपूर्ण समाज का निर्माणकर भारत को पुनः विश्वगुरु पद पर आसीन करें |
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1. इस वर्ष ‘बाल संस्कार और दिव्य प्रेरणा-प्रकाश’ के साथ ‘जीवन विकास’ पुस्तक भी सभी वर्गों के लिए अनिवार्य रहेगी ।
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2. विद्यालयों में पंजीकरण शुल्क ६ रुपये होगा, महाविद्यालयों में यह शुल्क ७ रुपये है ।
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3. राज्य स्तर पर अधिकतम विद्यार्थी पंजीकरण करनेवाली समिति को भी पुरस्कृत किया जायेगा ।
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4. राष्ट्रीय स्तर पर पूज्यश्री के करकमलों द्वारा पदक व पुरस्कार निम्न को प्राप्त होंगे
· ८वीं से १२वीं वर्ग तथा स्नातक वर्ग के प्रथम तीन तीन विजेताओ को स्वर्णपदक, पुरस्कार व नकद राशि ।
· सर्वाधिक पंजीकरण करनेवाली तीन समितियों के पाँच पाँच सेवाधारियों (प्रतियोगिता सेवा मंडल के सदस्य) को पदक ।
· एक मेट्रो समिति (दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद में से) के ५ सेवाधारियों को भी पदक।
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5. बाल संस्कार केन्द्रों में 'प्रतिभा खोज स्पर्धा' का आयोजन किया जा रहा है | अतः बाल संस्कार केन्द्रों में 'दिव्य प्रेरणा-प्रकाश प्रतियोगिता' नहीं आयोजित होगी |
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6. जिन विद्यालयों अथवा महाविद्यालयों को स्मृतिचिन्ह प्राप्त होंगे उनके प्रधानाचार्य एवं एक सक्रिय शिक्षक (जो प्रधानाचार्य द्वारा परीक्षा पंजीकरण हेतु नियुक्त किये गये हों) को एक विशेष उपहार का पैकेट भी प्राप्त होगा । साथ ही सक्रिय शिक्षक व महाविद्यालयों में G.S. (जनरल सेक्रेटरी) को भी प्रमाणपत्र प्राप्त होंगे । महाविद्यालयों में स्मृतिचिन्ह दिये जाने पर G.S. को भी स्मृतिचिन्ह दिया जायेगा । C.R.( क्लास रिप्रजेन्टेटिव) अपनी कक्षा में कम से कम २० विद्यार्थी पंजीकृत करें तो उन्हें भी प्रमाणपत्र प्राप्त होंगे ।
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कक्षा
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पाठ्यक्रम
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(प्रथम वर्ग)
५ वीं से ७ वीं कक्षा तक
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इस वर्ग के लिए 'बाल संस्कार' पुस्तक (६० अंक) तथा 'जीवन विकास' पुस्तक (४० अंक) पर आधारित १०० अंक का प्रश्न पत्र होगा |
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(द्वितीय वर्ग और स्नातक वर्ग)
८ वीं से १२ वीं तथा स्नातक कक्षाओं हेतु
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इन वर्गों के लिए 'दिव्या प्रेरणा-प्रकाश' पुस्तक (४० अंक), 'जीवन विकास' पुस्तक (३० अंक) तथा 'श्रीमद भगवदगीता, रामायण व महाभारत' (१०-१० अंक प्रति ग्रन्थ) पर आधारित १०० अंक का प्रश्न पत्र होगा |
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नोट : - परीक्षा में 'दिव्या प्रेरणा-प्रकाश' पुस्तक के पृष्ठ क्र. १ से ३८ तथा ६१ से ६४ पर आधारित प्रश्न होंगे |
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क्षेत्रीय स्तर :
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आप मुख्यालय को घोषणा पत्र भेजकर अपने अपने क्षेत्र में प्रतियोगिता का आयोजन कर सकते हैं ।
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राष्ट्रीय स्तर :
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राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता पूज्य बापूजी के पावन सान्निध्य में होनेवाले "विद्यार्थी तेजस्वी तालीम शिविर" में उत्तरी क्षेत्र और दक्षिणी क्षेत्र के लिए अलग अलग होगी, जिसकी सूचना SMS के द्वारा दी जायेगी । क्षेत्रीय स्तर पर, कक्षा 8 वी से 12 वी और स्नातक वर्ग के जिन विद्यार्थियों को ६० प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त होंगे, वे विद्यार्थी ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे ।
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वर्ष
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विद्यालयों / महाविद्यालयों
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2008
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5,066
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2009
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12,115
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2010
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17,942
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क्षेत्रीय स्तर पुरस्कार :
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1. तीनों वर्गों के प्रथम पाँच पाँच विजेताओ को पुरस्कार, उसमें भी प्रत्येक वर्ग के पहले तीन विजेताओ को विशेष स्मृतिचिन्ह ।
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2. सभी प्रतियोगियों को प्रमाणपत्र ।
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3. प्रत्येक विद्यालय \महाविद्यालय में हर वर्ग के प्रथम स्थान प्राप्त विद्यार्थी को भी पुरस्कार ।(उस वर्ग में कम से कम १० विद्यार्थी पंजीकृत हों ।)
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4. द्वितीय व स्नातक वर्ग में ६० प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करनेवाले प्रतियोगियों को विशेषता प्रमाणपत्र के साथ राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रवेश ।
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5. महाविद्यालय में ९० से अधिक तथा विद्यालय में शहरी स्तर पर १९० एवं २५० (अलग-अलग स्मृतिचिन्ह), ग्रामीण स्तर पर ९० से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत होने पर स्मृतिचिन्ह अथवा विशेष भेंट एवं एक वर्ष की ‘ऋषि प्रसाद’ मासिक पत्रिका की सदस्यता भी नि:शुल्क दी जायेगी ।
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6. जिन विद्यालयों, महाविद्यालयों को स्मृतिचिन्ह प्राप्त होंगे उनके प्रधानाचार्य एवं एक सक्रिय शिक्षक (जो प्रधानाचार्य द्वारा परीक्षा पंजीकरण हेतु नियुक्त किये गये हों) को एक विशेष उपहार का पैकेट भी प्राप्त होगा । साथ ही सक्रिय शिक्षक व महाविद्यालयों में G.S. (जनरल सेक्रेटरी) को भी प्रमाणपत्र प्राप्त होंगे । महाविद्यालयों में स्मृतिचिन्ह दिये जाने पर G.S. को भी स्मृतिचिन्ह दिया जायेगा । C.R.( क्लास रिप्रजेन्टेटिव) अपनी कक्षा में कमसेकम २० विद्यार्थी पंजीकृत करें तो उन्हें भी प्रमाणपत्र प्राप्त होंगे।
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राष्ट्रीय स्तर पुरस्कार :
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1. पूज्यश्री के करकमलों से इन दोनों वर्गों के प्रथम तीन तीन विजेताओ को स्वर्णपदक + नकदराशि + पुरस्कार (कुल ६ + ६ स्वर्णपदक) ।
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2. अन्य २०५-२०५ विजेताओ को प्रोत्साहनपुरस्कार तथा सभी प्रतिस्पर्धियों को प्रशस्तिपत्र ।
(उत्तरी व दक्षिणी क्षेत्रों के पुरस्कारों की संख्या समान रहेगी एवं पुरस्कारवितरण अलगअलग होगा ।)
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दिव्य प्रेरणा-प्रकाश ज्ञान प्रतियोगिता -२०११ में २५ लाख विद्यार्थियों को सहभागी बनाने के संकल्प में आप भी जुड़ सकते है ।
"बच्चों को अच्छे संस्कार देने की सेवा से आपमें बहुत निर्दोषता आ जाएगी |"
-पूज्य बापूजी
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विद्यालय / महाविद्यालय में अन्य साधकों के साथ जाकर प्रतियोगिता व 'योग व उच्च संस्कार शिक्षा कार्यक्रम' की अनुमति लें |
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अपने आस-पास परिचित साधकों की टीम (ग्रुप) बनाकर बैठक कर अपने क्षेत्र के ५/१०/१५ आदि विद्यालयों में सेवा की जिम्मेदारी लें व क्षेत्रीय बाल संस्कार प्रभारी / समिति से संपर्क करें।
(भाइयों और बहनों की बैठक अलग-अलग होगी)
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सेवाएँ :
- प्राचार्य से प्रतियोगिता की अनुमति हेतु मिलना |
- विद्यालयों में १-२ घंटे का 'योग व उच्च संस्कार शिक्षा कार्यक्रम' आयोजित करना |
- विद्यार्थियों को प्रतियोगिता की जानकारी देना |
- विद्यालयों में साहित्य (बाल संस्कार,दिव्य प्रेरणा-प्रकाश,जीवन विकास) पहुँचाना |
- प्रतियोगिता शुल्क लेकर विद्यार्थियों की रसीद काटना |
- अपने सेवा-समूह (ग्रुप) के सभी विद्यालयों का रिकॉर्ड बनाकर प्रभारी को शुल्क सहित.रिपोर्ट देना | (सेवादारी रिपोर्ट हेतु यहाँ click करे)
- परीक्षा के दिन सही समय पर प्रश्न-पत्र विद्यालय में पहुँचाकर परीक्षा लेना व बाद में उत्तर पत्र जाँचना |
- पुरस्कार व प्रमाण पत्र प्राप्त करके वितरण करना |
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प्रतियोगिता घोषणा के मुख्य बिंदु :
१.महान बनने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करें |
२.सत्साहित्य की महिमा (बाल संस्कार,दिव्य प्रेरणा-प्रकाश,जीवन विकास) बतायें |
३.वीरेंद्र मेहता (Oxford Advanced Learner's Dictionery के ८०००० शब्द कंठस्थ ), क्षितिज सोनी (भैंस चराने वाला गो एयर में इंजीनियर ), अजय मिश्रा (NOKIA,Global Product Manager) आदि का अनुभव बतायें |
४.प्रतियोगिता के पिछले वर्षों के आँकडे |
५.प्रतियोगिता के पुरस्कार,परीक्षा का दिन, समय, शुल्क आदि बताकर विदार्थियों को प्रेरित करें और अगले दिन शुल्क लाने हेतु बतायें|
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"दिव्य प्रेरणा-प्रकाश" ग्रंथ पढिये और दूसरों को भी पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कीजिए |
इससे आपका मंगल होगा और आपको देखकर दूसरों का भी मंगल होगा |"
-पूज्य बापूजी
Note: अपना अभिप्राय देने हेतु यहाँ click करें
दिव्या प्रेरणा-प्रकाश मार्गदर्शिका हेतु यहाँ click करें
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